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फॉर्म 17-C में ऐसा क्या लिखा होता है? जिसके आधार पर कहा जा रहा EVM से धांधली मुमकिन नहीं

दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकतर चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार ने  वोटिंग में धांधली और ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर सारी प्रक्रियाओं के बारे में स्पष्ट और विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि  कहा कि  चुनाव में कोई धांधली हो ही नहीं सकती है. वोटर लिस्ट बनने की प्रक्रिया से लेकर वोट डालने और काउंटिंग तक हर प्रक्रिया में सभी राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि मौजूद होते हैं.

इलेक्ट्रॉल रोल बनाने से लेकर वोटिंग और काउंटिंग के दिन भी अलग-अलग मौकों पर राजनीतिक पार्टियों के बूथ लेवल एजेंट, पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट होते हैं. इनके सामने और इनकी सहमति से ईवीएम जांच से लेकर वोटिंग शुरू करवाने और खत्म करवाने तक की प्रक्रियाएं पूरी होती है. इसी तरह मतगणना की भी सारी प्रक्रियाएं राजनीतिक पार्टियों के काउंटिंग एजेंट के सामने उनकी सहमति और आपत्ति के बाद ही पूरी होती है. पूरी चुनाव की पारदर्शिता फॉर्म 17C पर निर्भर करती है. जानते हैं ये होता क्या है?

राजनीतिक पार्टियों के एजेंट के सामने संपन्न होती है हर एक चुनावी प्रक्रिया
वोटिंग के दिन हर बूथ पर हर पार्टी का एक पोलिंग एजेंट होता है. वोटिंग शुरू होने से पहले सभी पार्टियों के पोलिंग एजेंट के सामने मतदान अधिकारी और कर्मी ईवीएम खोलकर दिखाते हैं कि वे सही तरीके से काम कर रहे हैं. हर एक ईवीएम पर उस वक्त ही आपत्ति भी ली जाती है. इसके बाद वोटिंग शुरू होता है. 

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